DNS क्या है (DNS in hindi)

dns kya h

इस ब्लॉग मे आप पढ़ेंगे की DNS क्या होता हैं (What is DNS in hindi).DNS के प्रकार (Types of DNS in hindi ) तथा DNS के इतिहास के बारे मे (History of DNS in hindi).

DNS क्या है (What is DNS in hindi).

दोस्तों DNS का पूरा नाम डोमेन नेम सिस्टम होता है। यह इंटरनेट की Phonebook की तरह है जिस प्रकार से की हम Phonebook में मोबाइल नंबर store करके रखते है उसी प्रकार से DNS भी Domain names की जानकारी अपने पास Store रखता है। मनुष्य Domain नामों के माध्यम से ही ऑनलाइन जानकारी का उपयोग कर पाते हैं, जैसे की यदि हमें किसी वेबसाइट पर जाना होता है तो उसके लिए हम उस वेबसाइट का डोमेन नाम अपने एड्रेस बार में सर्च करते है।अशल में एक डोमेन नाम एक IP Address ही होता है। और DNS किसी नाम को IP address से जोड़ता है।

जब हम कोई डोमेन नाम खरीदते है तो डोमेन नाम प्रदाता कम्पनिया हमे DNS का उपयोग कर ही डोमेन नाम प्रदान करती है। कोई भी ब्राउज़र इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP ) पतों के माध्यम से ही सुचना भेजते हैं। DNS , IP पतों पर डोमेन नामों का अनुवाद करता है ताकि ब्राउज़र इंटरनेट संसाधनों को लोड कर सकें।

डोमेन नेम सिस्टम कंप्यूटर, सेवाओं, या इंटरनेट या एक private नेटवर्क से जुड़े अन्य संसाधनों के लिए एक Hierarchical and decentralized नामकरण प्रणाली है। यह भाग लेने वाली प्रत्येक संस्थाओं को सौंपे गए डोमेन नामों के साथ विभिन्न जानकारी को जोड़ता है।

DNS के प्रकार (Types of DNS in hindi)

DNS Query Types

यह मुख्य रूप से 3 प्रकार की होती है –

1. Recursive Query ( पुनरावर्ती प्रश्न)

इसमें एक DNS client होस्टनाम प्रदान करता हैं और DNS Resolver उसका Answer देता है यदि इसके पास इस query का उत्तर होता है तो दे देता है, और यदि नहीं होता है, तो उपयोगकर्ता को एक Error देता है। रिसोल्वर, recursive query प्रक्रिया को DNS root सर्वर से प्रारंभ करता है, जब तक कि यह आधिकारिक( Authoritative) नाम सर्वर पर जो की अनुरोध(hold) किए गए होस्टनाम के लिए आईपी पता और अन्य जानकारी रखता है |

2. Iterative Query(पुनरावृत्ति क्वेरी)

एक पुनरावृत्ति क्वेरी (Iterative Query) में, एक DNS क्लाइंट होस्टनाम प्रदान करता है, और DNS रिसॉल्वर सबसे अच्छा जवाब देता है। यदि DNS रिसॉल्वर के पास अपने Cache में संबंधित DNS रिकॉर्ड होता है, तो यह उन्हें वापस वही उत्तर देता है। यदि नहीं होता है , तो यह DNS ग्राहक को रूट सर्वर, या किसी अन्य Authoritative Name Serve(आधिकारिक नाम सर्वर) को भेज देता है, जो आवश्यक DNS क्षेत्र के निकटतम होती है। इसके बाद DNS क्लाइंट को सीधे DNS सर्वर के खिलाफ क्वेरी या उत्तर दोहराना होता है ।

3. Non-Recursive Query (गैर-पुनरावर्ती प्रश्न)

एक Non-Recursive Query में DNS रिसॉल्वर पहले से ही उत्तर जानता है। यह या तो तुरंत DNS रिकॉर्ड देता है क्योंकि यह पहले से ही इसेअपनी लोकल cache मेमोरी में स्टोर रखता है, या फिर DNS को query भेजता है जो रिकॉर्ड के लिए आधिकारिक है, जिसका मतलब यह हुआ की यह उस होस्टनेम के आईपी को अपने पास रखता है।

दोनों ही मामलों में, Query या प्रश्नो के समाधान के लिए अतिरिक्त राउंड (जैसे recursive or iterative queries) की कोई आवश्यकता नहीं है। बल्कि, एक प्रतिक्रिया तुरंत ग्राहक को वापस भेज दिया जाता है।

DNS सर्वर के प्रकार (Types of DNS servers in hindi )

नीचे DNS सर्वर के प्रकार हैं, जिनका उपयोग होस्टनामों को IP पते में बदलने के लिए किया जाता है।

1. DNS Resolver

DNS Resolver (रिकर्सिव रिसॉल्वर) को DNS से सम्बंदित प्रश्नो के समाधान के लिए बनाया गया है, जिसमें “www.technohindi.in” जैसे मानव द्वारा पढ़े जा सकने वाले होस्टनाम शामिल हैं, और यह उस होस्टनेम के लिए IP पते को ट्रैक करने के लिए जिम्मेदार होता है।

एक DNS रिसॉल्वर, जिसे रिसॉल्वर के रूप में भी जाना जाता है, इंटरनेट पर एक सर्वर है जो डोमेन नामों को आईपी पतों में परिवर्तित करता है।

जब आप इंटरनेट का उपयोग करते हैं, तो हर बार जब आप अपने डोमेन नाम (जैसे “Technohindi.in’) का उपयोग करके वेबसाइट से Connect होते हैं, तो आपके कंप्यूटर को उस वेबसाइट का IP पता जानना होगा। तो आपका कंप्यूटर DNS रिसॉल्वर से संपर्क करता है, और Technohindi.in का वर्तमान आईपी पता प्रदान करता है.

2. DNS Root server

रूट सर्वर Hostname से आईपी एड्रेस तक की यात्रा में पहला कदम होता है। DNS रूट सर्वर, उपयोगकर्ता की Query से Top Level Domain (TLD) निकालता है – उदाहरण के लिए, www.example .com यहाँ .com TLD nameserver को विवरण प्रदान करता है। बदले में, वह सर्वर “example.com” सहित .com DNS जोन के साथ डोमेन के लिए विवरण प्रदान करेगा। दुनिया भर में 13 रूट सर्वर हैं, जो A से M तक के अक्षर द्वारा इंगित किए गए हैं, जो की इंटरनेट सिस्टम कंसोर्टियम, वेरिसाइन, ICANN ,और अमेरिकी सेना अनुसंधान प्रयोगशाला जैसे संगठनों द्वारा संचालित हैं।

3. आधिकारिक DNS सर्वर

एक आधिकारिक नाम सर्वर आपके DNS प्रश्नों का वास्तविक उत्तर प्रदान करता है जैसे कि – मेल सर्वर आईपी एड्रेस या वेब साइट आईपी एड्रेस (एक रिसोर्स रिकॉर्ड)। यह DNS प्रश्नों के मूल और निश्चित उत्तर प्रदान करता है। यह केवल cached उत्तर प्रदान नहीं करता है जो किसी अन्य नाम सर्वर से प्राप्त किए गए थे। इसलिए यह केवल उन डोमेन नामों के प्रश्नों के उत्तर देता है जो इसके कॉन्फ़िगरेशन सिस्टम में स्थापित हैं। आधिकारिक नाम सर्वर दो प्रकार के होते हैं:

1. Master server (primary name server) –

एक मास्टर सर्वर सभी प्रकार के रिकॉर्ड की Original मास्टर प्रतियां store रखता है। एक होस्टमास्टर केवल मास्टर सर्वर के ज़ोन रिकॉर्ड में परिवर्तन करता है। प्रत्येक slave सर्वर को DNS प्रोटोकॉल के विशेष प्रकार के स्वचालित updating system के माध्यम से update मिलता है। तथा सभी सर्वर मास्टर रिकॉर्ड की एक समान प्रतिलिपि बनाए रखते हैं।

2. Slave server (secondary name server)

 एक slave server मास्टर सर्वर का जैसा ही होता है। इसका उपयोग DNS सर्वर लोड को साझा करने और मास्टर सर्वर विफल होने की स्थिति में DNS ज़ोन उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। यह अनुशंसा की जाती है कि आपके पास प्रत्येक डोमेन नाम के लिए कम से कम 2 slave server और एक मास्टर सर्वर होना चाहिए।

DNS का इतिहास (History of DNS in hindi )

कंप्यूटर नेटवर्किंग को सरल बनाने का सारा श्रेय पॉल मॉकपेट्रिस को जाता है। वह और उनकी टीम ने मिशन बनाया की एक ऐसी प्रणाली तैयार की जाये जिसमे को लोगो को IP एड्रेस याद रखने की जरुरत न हो । इससे पहले, एक centralized HOSTS.TXT लेख था जो साइटों की mapping करने का कार्य कर रहा था। लेकिन, साइटों की बढ़ती संख्या के साथ – साथ , फ़ाइल भी बड़ी होती जा रही थी, और एक विकेंद्रीकृत मॉडल की सख्त आवश्यकता थी।

DNS 1983 में बनाया गया था और 1986 में मूल इंटरनेट मानकों(Standards) में से एक बन गया (इंटरनेट इंजीनियरिंग टास्क फोर्स IETF के निर्माण के बाद)। शुरुआत में चिह्नित दो दस्तावेज RFC 1034 और RFC 1035 हैं। ये पूरी प्रोटोकॉल कार्यक्षमता का वर्णन करते हैं और इसमें डेटा प्रकार शामिल हैं जो इसे ले जा सकते हैं।

अगर हम डोमेन नामों के बिना इंटरनेट की कल्पना करें: जब आपको अपने ईमेल को cheak करना होता है , अपने सोशल मीडिया स्थिति को update करने, तो अपने ब्राउज़र पर साइट का वेब पता टाइप करने के बजाय, आपको संख्याओं के एक समूह में टाइप करने की आवश्यकता होती है, जैसे कि 74.125.224.181 (GMAIL) या 69.171.234.21 (FACEBOOK)। हर बार जब आप ऑनलाइन जाते हैं तो ऐसा करने की कल्पना करें। यह आपके द्वारा यात्रा की जाने वाली प्रत्येक वेबसाइट के लिए एक फोन नंबर डायल करने जैसा है, और आपको जब भी किसी साइट पर जाना होगा तो आपको इसी तरीके के नंबर डालने पड़ सकते थे

सौभाग्य से, आपको संख्याओं की सूची याद करने की आवश्यकता नहीं है। डोमेन नेम सिस्टम (DNS) की वजह से इंटरनेट सर्फिंग काफी आसान हो गई है ।

तो, यह संक्षिप्त में DNS का इतिहास था। एक ऐसी तकनीक जो 30 साल से अधिक पुरानी है जिसके बिना हम नहीं रह सकते। यह इंटरनेट का उपयोग आसान बनती है।यह सुधार जारी रखेगा और हमें पूरे इंटरनेट पर बहुत ही अच्छा अनुभव प्रदान करेगा।

धन्यवाद।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *